कुछ दिन पहले कुछ ऑफिस के दोस्त साथ बैठे थे। एक ने पूछा 'यार भोपाल में देखने लायक क्या है?' दूसरे ने तपाक से जवाब दिया, 'बड़ा तालाब और वहां बना बोट क्लब, और क्या? इसके अलावा भोपाल में देखने लायक कुछ नहीं है। ' इतना कहते ही सब हंसने लगे। मुझे ना जाने क्यों बहुत बुरा लगा। शायद इसलिए क्योंकि ये मेरा शहर है, मेरा अपना। जैसे किसी 'अपने' के बारे में कोई कुछ बुरा कहे तो बुरा लगता है ना। कुछ वैसा ही महसूस किया मैंने। मन में ख्याल आया, क्या यही मेरे शहर की पहचान है? खैर, उस वक्त तो चुप रह गई, लेकिन बाद में इस बारे में बहुत सोचा। क्या वाकई मेरे शहर में देखने लायक कुछ नहीं है? या फिर लोगों के पास वो नज़र नहीं, जो उन जगहों को पहचान सकें, जो अपने आप में अनूठी हैं। दरअसल, हर शहर में देखने लायक तो बहुत कुछ होता है, लेकिन रहने वालों के लिए यह सब दशर्नीय स्थल घर की मुर्गी दाल बराबर के समान हो जाते हैं। उनकी नजर में वो जगहें, इमारतें सब आम हो जाती हैं, इसलिए शायद यह कह दिया जाता है कि यहां देखने लायक कुछ नहीं है। लेकिन ये भी तो हो सकता है कि पर्यटक के लिए वह जगह, वह इमारत देखना और उसके बारे में जानना यादगार बन जाए?
जब मैंने इस लिहाज़ से सोचा, तो पाया कि भोपाल इतिहास और पुरात्व के लिहाज़ से काफी समृद्ध शहर है। प्राकृतिक समृद्धि भी इसे विरासत में मिली है, जो इस शहर को और भी रमणीय बना देती है। लेकिन इसके अलावा और क्या खास है भोपाल में, जो देखने लायक है? सुल्तानिया इंफेंट्री के पास बना बहुत समय पुराना गुफा मंदिर, जहां हर साल सावन और शिवरात्रि में बहुत बड़ा मेला लगता है या किसी ज़माने में हनुमान टेकरी के नाम से जानी जाने वाली महावीर गिरि जिसे मनुआभान की टेकरी भी कहा जाता है, जो कि जैनियों का तीर्थ स्थल है और जहां रोप वे का आनंद भी लिया जा सकता है। इस पहाड़ी से भोपाल का जो नजारा देखने को मिलता है, उसे सिर्फ आंखों के कैमरे से ही मस्तिष्क के पटल पर उतारा जा सकता है। वहीं से आगे बढ़ें तो एक ज़माने में शहर के बीचों बीच बनी ताज़ुल मसाजिद भी कम दर्शनीय नहीं। आखिर हो भी क्यों ना, आखिर ये मस्जिद एशिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में शुमार जो होती है। ऐसा कहा जाता है कि पहले आप भोपाल के किसी भी कोने से इस मस्जिद को देख सकते थे। वक्त का रुख बदला और लंबी इमारतों ने इसे भले ही ढक लिया हो, लेकिन इसकी खूबसूरती को ढकने में नाकामयाब रहे। मैंने थोड़ा और सोचा और पाया कि दुनिया की सबसे छोटी मस्जिद यानी ढाई सीढ़ी की मस्जिद भी यहीं भोपाल में ही मौजूद है। इतनी छोटी मस्जिद भी किसी अजूबे से कम नहीं, लेकिन गांधी मेडिकल कॉलेज के परिसर में होने के कारण शायद पुरात्व विभाग की नज़र अब तक इसपर नहीं पड़ी।
ऐसी बात नहीं कि मप्र का दिल कहे जाने वाले इस शहर में सिर्फ मस्जिदें ही देखने लायक हैं, यहां पर एक से एक मंदिर भी मौजूद हैं। बिरला मंदिर, कंकाली माता का मंदिर, छोटे तालाब के पास बना काली मंदिर, पीरगेट के पास बना कफ्र्यू वाली माता का मंदिर जिसपर सोने का गुंबद लगा है, आदि आदि। इन सभी की अपनी अलग कहानी है, जिनसे इनके खास होने का पता चलता है। अब बात अगर दूसरे दर्शनीय स्थलों की करें, तो यहां का वन विहार, मानव संग्रहालय, भारत भवन आदि ऐसे भी स्थल हैं, जिनकी न सिर्फ राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति है बल्कि जिन्हें अंग्रेजी में प्लेज़र टू वॉच भी कहा जा सकता है।
देखा, बात पर बात निकली तो कितनी जगहें याद आती चली गईं। और अभी तो और भी कई जगहें याद करना बाकी है, भोपाल में भी और आस-पास भी। लेकिन यहां आने वाले लोगों को ही नहीं, शायद इस शहर को कुछ सालों से अपना बसेरा बनाने वालों को भी इनमें से कई जगहों के बारे में या तो नहीं मालूम होगा या वे इनका महत्व नहीं जानते होंगे।
ऐसा सिर्फ मेरे शहर के साथ ही नहीं है, बल्कि हर आम शहर के लिए लोग अक्सर ऐसा ही कहते हैं, लेकिन अगर गौर किया जाए, तो हर शहर के पास अपना एक खज़ाना होता है, जिसे ढूंढ़ पाना किसी पारखी के बस की बात है या फिर उसके, जिसके लिए वो शहर उसका अपना है।
Badhiya, Ek Achche subject par aapne bahut dil se likha. "Apne" aur "Apnepan" ko isi tarah justify kiya ja sakta hai. Apne shahar ke baare mein bura sunkar har insaan ko bura lagna chahiye, aakhir hum issi maati mein pale- badhe hain, to iss tarah issase bemuravvat to nahin hona chahiye. Iski aabo-hawa ke hum karzdaar hai.Ek achche vishay par achcha likhne k liye badhai.
ReplyDeleteAmar Sinha
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ReplyDeleteBaat Dil ko choo gayi
ReplyDelete@Amar... Thank you very much... bas koshish ki hai ki apne shahar ke baare me thoda bahut bata sakun...
ReplyDelete@Vivek... Yes you can.. bas mujhe credit dena mat bhoolna :)
@Narender.. thanks yaar..
splendid job
ReplyDelete*NOTEWORTHY: the GMC mosque fact!!